#आरबीआई #RBI ने नोटबंदी # notebandi के आंकड़े जारी करते हुए बताया,
कि बंद हुए 1000 रुपये के करीब 99 फीसदी नो ट बैंकों में लौट आये हैं | 1000 रुपये के 8.9 करोड़ नोट (1.3 फीसदी) नहीं लौटे हैं। यहाँ "नोट" शब्द पर मैं विशेष जोर देना चाहता हूँ |
ये जो 1000 रुपये के 8.9 करोड़ नोट जो बैंको में नहीं आये हैं उनकी टोटल वैल्यू पता हैं कितनी होगी ? उसकी टोटल वैल्यू होगी 89 अरब रूपये , अंको में Rs.89000000000/-
पहली बात यह कि अगर इस आकड़े को सही माने जाए तो 89 अरब रुपया काला धन था , जिसको लोगो ने बैंक तक नहीं पहुचाया, चाहे जो भी वजह हो |
दूसरी बात, यह आकड़ा सिर्फ 1000 के नोटों का हैं, अभी 500 के नोटों का आना बाकी हैं |
तीसरी बात, घर पर बोरा में भर-भर कर रखे गए नोट जिन पर कोई टैक्स नहीं लगता था , वो अगर नोट्बंदी के वजह से बैंको में जमा कर दिए गए , तो इसका मतलब यह नहीं कि वो सफ़ेद हो जाएगा |
चौथी बात, अगर नोटबंदी असफल थी तो सरकार 12 लाख डुप्लीकेट पैन कार्ड कैसे निकाल पाई ?
पांचवी बात, नोट्बंदी के बाद देश में अचानक से 56 लाख नए कर दाता कहा से बढ़ गए ?
ये 56 लाख लोगो में से 90% वही लोग हैं जिन्होंने बैंको में अपना काला धन जमा किया था (उस काले धन में 1000-500 के नोट भी रहे होंगे )
छठी बात , सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT के सामने सरकार ने जुलाई 2017 में एक Affidavit दाखिल कर बताया था कि 1 अप्रैल 2014 लेकर 28 फरवरी 2017 तक
Rs. 71,941 Crore रूपये की अघोषित आय प्राप्त की गयी हैं, यानी Black Money,
अब SC द्वारा गठित SIT के सामने तो सरकार गलत डाटा नहीं देगी न? या आपको लगता हैं कि देगी।
Rs 71,941 करोड़ मतलब जानते हो कितना होता हैं ? इसलिए पूछ रहा हूँ भाई क्योंकि Rs 71,941 करोड़ शायद आपको थोड़ा छोटा लग रहा होगा,
अगर इसको अंको में लिखेंगे तो Rs.7,19,41,00,00000/- ( यानी 7 ख़रब 19 अरब 41 करोड़ रुपया ) यदि अपको यकीन नहीं होता तो आप एक बार pls गूगल कर लेना, सम्बन्धित वेबसाइट पर ये सारा डाटा उपलब्ध है। ये अघोषित आय है, जिसमे सरकार द्वारा बनाए गए टैक्स स्लैब के अनुसार भुगतान करके जिनकी-जिनकी ये अघोषित आय है, वे उसको सफ़ेद कर सकते हैं |
अंत में यही कहूँगा कि नोट्बंदी पर ज्ञान बांटने से पहले थोड़ा अच्छे से अध्ययन करना जरुरी हैं, और अगर आपके पास अध्ययन करने का समय नहीं हैं, तो एक बार जा कर उन लोगो से मिलिए, जिनको 8 नवम्बर के बाद से नींद आनी बंद हो गयी थी | जिनकी नींद बंद हुयी थी न , ये वही लोग हैं जो आज #Right to Privacy के नाम पर आधार को पैन #कार्ड_से_जोड़ने_का_विरोध_कर रहे।